इस प्रक्रिया में दर्द और स्पर्श संवेदन की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.
2.
रीतिकाल काव्य ही क्यों, नई कविता भी स्पर्श संवेदन के अभाव में असंभव होती।
3.
जैसे की पके-मीठे आम की गंध के संवेदन के स्मरण से पैदा हुआ क्षोभ एक साथ मनुष्य की चेतना में आम का बिंब, आम का स्वाद, उसके आकार का स्पर्श संवेदन, फिर जो भी पहले मिल जाए या जो स्मृति में ज्यादा प्रखर हो, आम का ठेला, बेचने वाला, जगह, बातचीत या घर का वह दृश्य जब आम खाए गये हों एक साथ मनुष्य की चेतना में उभर आते हैं।
4.
नतीजा होता है निचली कमर (कमर के निचले हिस्से), नितम्बों और जोड़ों का दर्द. इस गैर-ज़रूरी शल्य कर्म के दूसरे अवांच्छित परिणाम होतें हैं भूख का कम होना, मर जाना भूख का, यौन इच्छा में कमी (यौन सम्बन्ध विमुखता), मूत्र त्याग के संयम का अभाव, मलत्याग में मुश्किलातें (Bowel problems), आईसी फीट एंड टोज़, अश्थियों और जोड़ों में दर्द, कमर के नीचे स्पर्श संवेदन अनुक्रिया का अभाव, याददाश्त क्षय, अवसाद (डिप्रेशन).